तुम नोटों के घुलाम हो,
ईमान बेच के नोट कमाते हो
आज़ादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम समाज के घुलाम हो,
समाझ के डर से आवाज़ नहीं उठाते हो
आज़ादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम वक़्त के घुलाम हो,
अँधेरे के डर से बहार नहीं जाते हो
आज़ादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम धर्म के घुलाम हो,
धर्म के नाम पे दंगे मचाते हो
आजादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम भ्रष्टाचार के घुलाम हो,
घूस खाते हो और खिलाते हो
आजादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम निरक्षरता के घुलाम हो,
अपनी बेटियों को क्यों नहीं पढ़ाते हो
आजादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम किस के घुलाम हो?
जो अपना दिमाग नहीं चलाते हो?
आजादी का जश्न क्यों मनाते हो?
तुम घुलाम हो!

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